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mahabharat 1.61.16-17: ऐसा लग रहा था मानो भगवान स्वयं पांडवों को भविष्य में घटित होने वाली घटना से बचा रहे हों। जब दुर्योधन गुप्त या प्रकट रूप से अनेक उपायों से भी पांडवों का नाश न कर सका, तब उसने कर्ण और दु:शासन आदि मंत्रियों से परामर्श करके धृतराष्ट्र की अनुमति से वारणावत नगर में एक लाक्षागृह बनवाने का आदेश दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  1.61.16-17 
यदा तु विविधोपायै: संवृतैर्विवृतैरपि।
नाशकद् विनिहन्तुं तान् दैवभाव्यर्थरक्षितान्॥ १६॥
तत: सम्मन्त्र्य सचिवैर्वृषदु:शासनादिभि:।
धृतराष्ट्रमनुज्ञाप्य जातुषं गृहमादिशत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ऐसा लग रहा था मानो भगवान स्वयं पांडवों को भविष्य में घटित होने वाली घटना से बचा रहे हों। जब दुर्योधन गुप्त या प्रकट रूप से अनेक उपायों से भी पांडवों का नाश न कर सका, तब उसने कर्ण और दु:शासन आदि मंत्रियों से परामर्श करके धृतराष्ट्र की अनुमति से वारणावत नगर में एक लाक्षागृह बनवाने का आदेश दिया।
 
It was as if the God himself was protecting the Pandavas from the incident that was going to happen in the future. When Duryodhan could not destroy the Pandavas even by various means, either secretly or openly, then he, after consulting with ministers like Karna and Dushasan, ordered the construction of a lacquered house in the city of Varanavat with the permission of Dhritarashtra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)