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mahabharat 1.61.12: जब कुन्तीपुत्र बलवान भीम ने अपनी आँखें खोलीं, तो वे सब बन्धन तोड़कर बिना किसी पीड़ा के खड़े हो गए ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.61.12 
यदा विबुद्ध: कौन्तेयस्तदा संछिद्य बन्धनम्।
उदतिष्ठन्महाबाहुर्भीमसेनो गतव्यथ:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जब कुन्तीपुत्र बलवान भीम ने अपनी आँखें खोलीं, तो वे सब बन्धन तोड़कर बिना किसी पीड़ा के खड़े हो गए ॥12॥
 
When Kunti's son, the powerful Bhima, opened his eyes, he broke all the bonds and stood up without any pain. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)