श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.60.8 
तत्र राजानमासीनं ददर्श जनमेजयम्।
वृतं सदस्यैर्बहुभिर्देवैरिव पुरन्दरम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि राजा जनमेजय अपने सिंहासन पर बहुत से सभासदों से घिरे हुए बैठे हैं, मानो देवताओं के राजा इन्द्र देवताओं से घिरे हुए हों ॥8॥
 
Reaching there he saw King Janamejaya sitting on his throne, surrounded by many members of the court, as if the king of gods Indra was surrounded by gods. ॥ 8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas