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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना
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श्लोक 7
श्लोक
1.60.7
जनमेजयस्य राजर्षे: स महात्मा सदस्तदा।
विवेश सहित: शिष्यैर्वेदवेदाङ्गपारगै:॥ ७॥
अनुवाद
उस समय महर्षि व्यास अपने वेद-वेदांगों में पारंगत शिष्यों के साथ राजा जनमेजय की यज्ञ वेदी में आये।
At that time the great sage Vyasa, along with his disciples well versed in the Vedas and Vedangas, entered the sacrificial altar of King Janamejaya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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