Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.60.6: उनकी कीर्ति पुण्यमयी है और वे अत्यन्त यशस्वी हैं। उन्होंने ही शान्तनु की संतानों की परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए पाण्डु, धृतराष्ट्र और विदुर को जन्म दिया था ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.60.6 
य: पाण्डुं धृतराष्ट्रं च विदुरं चाप्यजीजनत्।
शान्तनो: संततिं तन्वन् पुण्यकीर्तिर्महायशा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उनकी कीर्ति पुण्यमयी है और वे अत्यन्त यशस्वी हैं। उन्होंने ही शान्तनु की संतानों की परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए पाण्डु, धृतराष्ट्र और विदुर को जन्म दिया था ॥6॥
 
His fame is virtuous and he is very famous. It was he who gave birth to Pandu, Dhritarashtra and Vidur to expand the tradition of Shantanu's children. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)