Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.60.3-4: जन्म लेते ही उन्होंने इच्छानुसार अपना शरीर बड़ा कर लिया और महाप्रतापी व्यासजी ने समस्त वेदों का, उनके भागों और इतिहास सहित ज्ञान प्राप्त कर लिया और उस परम तत्व का भी ज्ञान प्राप्त कर लिया, जिसे कोई भी तप, वेदाध्ययन, व्रत, संयम, शांति और यज्ञ आदि से भी प्राप्त नहीं कर सकता॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 1.60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जातमात्रश्च य: सद्य इष्टॺा देहमवीवृधत् ।
वेदांश्चाधिजगे साङ्गान् सेतिहासान् महायशा:॥ ३॥
यन्नैति तपसा कश्चिन्न वेदाध्ययनेन च।
न व्रतैर्नोपवासैश्च न प्रशान्त्या न मन्युना॥ ४॥
अनुवाद
जन्म लेते ही उन्होंने इच्छानुसार अपना शरीर बड़ा कर लिया और महाप्रतापी व्यासजी ने समस्त वेदों का, उनके भागों और इतिहास सहित ज्ञान प्राप्त कर लिया और उस परम तत्व का भी ज्ञान प्राप्त कर लिया, जिसे कोई भी तप, वेदाध्ययन, व्रत, संयम, शांति और यज्ञ आदि से भी प्राप्त नहीं कर सकता॥3-4॥
As soon as he was born, he enlarged his body at will and the illustrious Vyasa (himself) attained the knowledge of all the Vedas along with their parts and history, and also of that Supreme Reality, which no one can obtain even by austerities, study of Vedas, vows, abstinence, peace and sacrifices etc.॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥