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mahabharat 1.60.20: द्विजश्रेष्ठ! ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे सभी पूर्वजों के मन में युद्ध की बुराई की प्रेरणा प्रारब्ध ने ही उत्पन्न की थी। कृपया उनका सम्पूर्ण वृत्तांत यथावत् वर्णन करें। 20॥   |   mahabharat अध्याय 1.60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.60.20 
पितामहानां सर्वेषां दैवेनानिष्टचेतसाम्।
कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येनैतन्ममाचक्ष्व यथावृत्तं द्विजोत्तम॥ २०॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे सभी पूर्वजों के मन में युद्ध की बुराई की प्रेरणा प्रारब्ध ने ही उत्पन्न की थी। कृपया उनका सम्पूर्ण वृत्तांत यथावत् वर्णन करें। 20॥
 
Dwijshreshtha! It seems that destiny itself had influenced the minds of all my ancestors towards the evil of war. Please describe his entire story exactly. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)