श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.60.18 
जनमेजय उवाच
कुरूणां पाण्डवानां च भवान् प्रत्यक्षदर्शिवान्।
तेषां चरितमिच्छामि कथ्यमानं त्वया द्विज॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय बोले - हे ब्रह्मन्! आपने कौरवों और पाण्डवों को प्रत्यक्ष देखा है, अतः मैं आपके द्वारा वर्णित उनका चरित्र सुनना चाहता हूँ॥ 18॥
 
Janamejaya said - O Brahman! You have seen the Kauravas and the Pandavas directly; therefore I wish to hear their character as narrated by you.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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