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श्लोक 1.60.16  |
भगवानपि तं दृष्ट्वा कुशलं प्रतिवेद्य च।
सदस्यै: पूजित: सर्वै: सदस्यान् प्रत्यपूजयत्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान व्यास ने भी जनमेजय की ओर देखकर उसका कुशल-क्षेम पूछा और सभा के अन्य सदस्यों द्वारा सम्मानित होकर उन्होंने भी उसका सत्कार किया॥16॥ |
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| Lord Vyasa too looked at Janamejaya and informed him about his well-being. Being honoured by the other members of the assembly, he too honoured him.॥ 16॥ |
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