श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.60.15 
तथा च पूजयित्वा तं प्रणयात् प्रपितामहम्।
उपोपविश्य प्रीतात्मा पर्यपृच्छदनामयम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पितामह व्यास की प्रेमपूर्वक पूजा करके जनमेजय प्रसन्न हो गए और उनके पास बैठकर उनका कुशलक्षेम पूछने लगे॥15॥
 
After worshipping grandfather Vyasa with love, Janamejaya became pleased and he sat beside him and inquired about his well-being.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)