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mahabharat 1.60.13: उन्होंने अपने दादा श्री कृष्णद्वैपायन को, जो इन वस्तुओं को प्राप्त करने के अधिकारी थे, विधिपूर्वक पाद्य, आचमन, अर्घ्य और गौ भेंट की ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.60.13 
पाद्यमाचमनीयं च अर्घ्यं गां च विधानत:।
पितामहाय कृष्णाय तदर्हाय न्यवेदयत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने दादा श्री कृष्णद्वैपायन को, जो इन वस्तुओं को प्राप्त करने के अधिकारी थे, विधिपूर्वक पाद्य, आचमन, अर्घ्य और गौ भेंट की ॥13॥
 
He presented padya, achamaniya, arghya and cow with rituals to his grandfather Shri Krishnadvaipayana, who was entitled to receive these things. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)