श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 60: जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.60.10 
जनमेजयस्तु राजर्षिर्दृष्ट्वा तमृषिमागतम्।
सगणोऽभ्युद्ययौ तूर्णं प्रीत्या भरतसत्तम:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महर्षि व्यास को आते देख भरत के राजा जनमेजय बड़े प्रसन्न होकर उठ खड़े हुए और तुरन्त अपने सेवकों के साथ उनका स्वागत करने चले गये।
 
On seeing the sage Vyasa arriving, the great king of Bharata, Janamejaya, stood up with great joy and immediately went with his servants to receive him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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