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mahabharat 1.6.9: इस प्रकार भृगु के पुत्र प्रतापी च्यवन का जन्म हुआ। तत्पश्चात पिता भृगुन ने अपने पुत्र च्यवन और पत्नी पुलोमा को वहाँ देखा और सब कुछ जानकर अपनी पत्नी पुलोमा से क्रोधित होकर पूछा - 9॥   |   mahabharat अध्याय 1.6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.6.9 
स एव च्यवनो जज्ञे भृगो: पुत्र: प्रतापवान्।
तं ददर्श पिता तत्र च्यवनं तां च भामिनीम्।
स पुलोमां ततो भार्यां पप्रच्छ कुपितो भृगु:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भृगु के पुत्र प्रतापी च्यवन का जन्म हुआ। तत्पश्चात पिता भृगुन ने अपने पुत्र च्यवन और पत्नी पुलोमा को वहाँ देखा और सब कुछ जानकर अपनी पत्नी पुलोमा से क्रोधित होकर पूछा - 9॥
 
In this way, Bhrigu's son Pratapi Chyavan was born. Thereafter, father Bhrigun saw his son Chyavana and wife Puloma there and after knowing everything, he got angry with his wife Puloma and asked - 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)