Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.6.7-8: वह नदी तपस्वी भृगु की पत्नी के मार्ग में जल भर रही थी। उस समय जगतपिता ब्रह्माजी ने पुलोमा के मार्ग पर चलने वाली उस नदी को देखकर उसका नाम वधूसर रखा, जो च्यवन के आश्रम के निकट बहती है। 7-8॥ | mahabharat अध्याय 1.6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह नदी तपस्वी भृगु की पत्नी के मार्ग में जल भर रही थी। उस समय जगतपिता ब्रह्माजी ने पुलोमा के मार्ग पर चलने वाली उस नदी को देखकर उसका नाम वधूसर रखा, जो च्यवन के आश्रम के निकट बहती है। 7-8॥
That river was flooding the path of the wife of the ascetic Bhrigu. At that time, Lord Brahma, the great father of the world, after seeing the river that followed the path of Puloma, named it Vadhusara, which flows near Chyavan's ashram. 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥