Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.6.5-6: समस्त लोकों के पिता ब्रह्माजी ने स्वयं उस पतिव्रता स्त्री भृगुकि को रोते और आँखों से आँसू बहाते देखा। तब पितामह ब्रह्माजी ने अपनी पुत्रवधू को सांत्वना दी और उसे धैर्य बँधाया। उसके आँसुओं की बूँदों से एक विशाल नदी प्रकट हुई। 5-6॥ | mahabharat अध्याय 1.6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तां ददर्श स्वयं ब्रह्मा सर्वलोकपितामह:।
रुदतीं बाष्पपूर्णाक्षीं भृगोर्भार्यामनिन्दिताम्॥ ५॥
सान्त्वयामास भगवान् वधूं ब्रह्मा पितामह:।
अश्रुबिन्दूद्भवा तस्या: प्रावर्तत महानदी॥ ६॥
अनुवाद
समस्त लोकों के पिता ब्रह्माजी ने स्वयं उस पतिव्रता स्त्री भृगुकि को रोते और आँखों से आँसू बहाते देखा। तब पितामह ब्रह्माजी ने अपनी पुत्रवधू को सांत्वना दी और उसे धैर्य बँधाया। उसके आँसुओं की बूँदों से एक विशाल नदी प्रकट हुई। 5-6॥
Brahmaji, the father of all the worlds, himself saw that devoted wife Bhriguki crying and shedding tears from her eyes. Then the grandfather Lord Brahma consoled his daughter-in-law and gave her patience. A huge river appeared from the drops of her tears. 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥