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mahabharat 1.6.2: हे भृगुवंश के मुखिया! उस समय माता के गर्भ में स्थित वह गर्भस्थ शिशु अत्यन्त क्रोध के कारण योगबल से माता के गर्भ से बाहर आ गया। बाहर गिर जाने के कारण उसका नाम च्यवन पड़ा॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.6.2 
तत: स गर्भो निवसन् कुक्षौ भृगुकुलोद्वह।
रोषान्मातुश्च्युत: कुक्षेश्च्यवनस्तेन सोऽभवत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे भृगुवंश के मुखिया! उस समय माता के गर्भ में स्थित वह गर्भस्थ शिशु अत्यन्त क्रोध के कारण योगबल से माता के गर्भ से बाहर आ गया। बाहर गिर जाने के कारण उसका नाम च्यवन पड़ा॥ 2॥
 
O head of the Bhrigu clan! At that time, the foetus which was residing in the womb of its mother, came out of the womb of the mother due to extreme anger by the power of yoga. Because of falling out, it was named Chyavan.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)