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mahabharat 1.6.13: आपके इस पुत्र के पराक्रम से ही मैं उस राक्षस के चंगुल से छूट सका। वह राक्षस मुझे छोड़कर नीचे गिर पड़ा और जलकर भस्म हो गया॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.6.13 
साहं तव सुतस्यास्य तेजसा परिमोक्षिता।
भस्मीभूतं च तद् रक्षो मामुत्सृज्य पपात वै॥ १३॥
 
 
अनुवाद
आपके इस पुत्र के पराक्रम से ही मैं उस राक्षस के चंगुल से छूट सका। वह राक्षस मुझे छोड़कर नीचे गिर पड़ा और जलकर भस्म हो गया॥13॥
 
Due to the power of this son of yours, I was able to escape from the clutches of that demon. The demon left me and fell down and was burnt to ashes.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)