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mahabharat 1.6.12: पुलोमा बोली - हे प्रभु ! अग्निदेव ने उस राक्षस को मेरा स्वरूप दे दिया था। इस कारण वह राक्षस मुझे कुररी के समान विलाप करते हुए ले गया ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.6.12 
पुलोमोवाच
अग्निना भगवंस्तस्मै रक्षसेऽहं निवेदिता।
ततो मामनयद् रक्ष: क्रोशन्तीं कुररीमिव॥ १२॥
 
 
अनुवाद
पुलोमा बोली - हे प्रभु ! अग्निदेव ने उस राक्षस को मेरा स्वरूप दे दिया था। इस कारण वह राक्षस मुझे कुररी के समान विलाप करते हुए ले गया ॥12॥
 
Puloma said - O Lord! Agnidev gave me my identity to that demon. Due to this, the demon took me away while I was wailing like a Kurri.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)