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mahabharat 1.6.11: प्रिये! सच-सच बताओ। आज मैं क्रोधित हूँ और अपने अपराधी को शाप देना चाहता हूँ। मेरे शाप से कौन नहीं डरता? किसने यह अपराध किया है?॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 6: महर्षि च्यवनका जन्म, उनके तेजसे पुलोमा राक्षसका भस्म होना तथा भृगुका अग्निदेवको शाप देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.6.11 
तत्त्वमाख्याहि तं ह्यद्य शप्तुमिच्छाम्यहं रुषा।
बिभेति को न शापान्मे कस्य चायं व्यतिक्रम:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
प्रिये! सच-सच बताओ। आज मैं क्रोधित हूँ और अपने अपराधी को शाप देना चाहता हूँ। मेरे शाप से कौन नहीं डरता? किसने यह अपराध किया है?॥11॥
 
Dear! Tell me the truth. Today I am angry and want to curse my offender. Who is not afraid of my curse? Who has committed this crime?॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)