| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 59: महाभारतका उपक्रम » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 1.59.9  | सौतिरुवाच
हन्त ते कथयिष्यामि महदाख्यानमुत्तमम्।
कृष्णद्वैपायनमतं महाभारतमादित:॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | उग्रश्रवाजी बोले- शौनक! मैं बड़ी प्रसन्नता के साथ महाभारत नामक उत्तम उपाख्यान को प्रारम्भ से कहूँगा, जो श्री कृष्णद्वैपायन वेदव्यास के अनुसार है। | | | | Ugrashravaji said- Shaunak! With great pleasure I will narrate from the beginning the excellent anecdote called Mahabharata, which is according to Shri Krishnadvaipayana Vedavyasa. 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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