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mahabharat 1.58.23: जो कोई दिन या रात्रि में असित, आर्तिमान और सुनीथ मंत्र का पाठ करता है, उसे सर्पों का भय नहीं रहता। 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.58.23 
असितं चार्तिमन्तं च सुनीथं चापि य: स्मरेत्।
दिवा वा यदि वा रात्रौ नास्य सर्पभयं भवेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो कोई दिन या रात्रि में असित, आर्तिमान और सुनीथ मंत्र का पाठ करता है, उसे सर्पों का भय नहीं रहता। 23॥
 
'Whoever recites Asit, Artiman and Sunith mantras during the day or night will have no fear of snakes. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)