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mahabharat 1.58.18: वह बहुत प्रसन्न होकर घर गया और अपने मामा और माता से मिला तथा उनके चरणों में प्रणाम करके उन्हें सारा समाचार सुनाया।   |   mahabharat अध्याय 1.58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 58: यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.58.18 
स गत्वा परमप्रीतो मातुलं मातरं च ताम्।
अभिगम्योपसंगृह्य तथावृत्तं न्यवेदयत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वह बहुत प्रसन्न होकर घर गया और अपने मामा और माता से मिला तथा उनके चरणों में प्रणाम करके उन्हें सारा समाचार सुनाया।
 
He went home very happy and met his maternal uncle and mother and after paying obeisance at their feet he told them all the news.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)