Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.57.8-10: अब मैं तक्षक के वंश में उत्पन्न हुए नागों का वर्णन करूँगा, उनके नाम सुनो- पुच्छन्दक, माण्डलक, पिण्डसेक्त, रभेनक, उच्चिख, शरभ, भंग, बिल्वतेज, विरोहण, शिलि, शालकर, मूक, सुकुमार, प्रवेपन, मुद्गर, शिशुरोमा, सुरोमा तथा महाहनु - ये तक्षक के वंशज नाग थे, जो सर्पसत्र की अग्नि में भस्म हो गये। 8-10॥ | mahabharat अध्याय 1.57: सर्पयज्ञमें दग्ध हुए प्रधान-प्रधान सर्पोंके नाम । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब मैं तक्षक के वंश में उत्पन्न हुए नागों का वर्णन करूँगा, उनके नाम सुनो- पुच्छन्दक, माण्डलक, पिण्डसेक्त, रभेनक, उच्चिख, शरभ, भंग, बिल्वतेज, विरोहण, शिलि, शालकर, मूक, सुकुमार, प्रवेपन, मुद्गर, शिशुरोमा, सुरोमा तथा महाहनु - ये तक्षक के वंशज नाग थे, जो सर्पसत्र की अग्नि में भस्म हो गये। 8-10॥
Now I will describe the snakes born in Takshak's clan, listen to their names - Puchhandak, Mandalak, Pindsekta, Rabhenak, Uchchikh, Sharabh, Bhang, Bilvateja, Virohan, Shili, Shalkar, Mook, Sukumar, Pravepan, Mudgar, Shishuroma, Suroma and Mahahanu - these were the snakes descended from Takshak, who perished in the fire of Sarpasatra. 8-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥