Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.57.7: ये नाग वासुकि के वंशज थे और इन्हें अग्नि में प्रवेश करना पड़ा। हे ब्रह्मन्! इसी वंश में उत्पन्न हुए अन्य अनेक अत्यंत शक्तिशाली और भयंकर नाग थे। वे सभी नाग-यज्ञ की प्रज्वलित अग्नि में आहुति बन गए। 7. | mahabharat अध्याय 1.57: सर्पयज्ञमें दग्ध हुए प्रधान-प्रधान सर्पोंके नाम । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एते वासुकिजा नागा: प्रविष्टा हव्यवाहने।
अन्ये च बहवो विप्र तथा वै कुलसम्भवा:।
प्रदीप्ताग्नौ हुता: सर्वे घोररूपा महाबला:॥ ७॥
अनुवाद
ये नाग वासुकि के वंशज थे और इन्हें अग्नि में प्रवेश करना पड़ा। हे ब्रह्मन्! इसी वंश में उत्पन्न हुए अन्य अनेक अत्यंत शक्तिशाली और भयंकर नाग थे। वे सभी नाग-यज्ञ की प्रज्वलित अग्नि में आहुति बन गए। 7.
These were the serpents who were the descendants of Vasuki and had to enter the fire. O Brahmin! There were many other very powerful and fierce serpents who were born in the same clan. All of them became sacrifices in the blazing fire of the serpent fire. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥