Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.57.4: पहले वासुकि के कुल में उत्पन्न हुए मुख्य-मुख्य नागों के नाम सुनो - वे सब-के-सब नीले, लाल, श्वेत और भयानक थे। उनके शरीर विशाल थे और उनका विष अत्यंत भयंकर था ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.57: सर्पयज्ञमें दग्ध हुए प्रधान-प्रधान सर्पोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 57: सर्पयज्ञमें दग्ध हुए प्रधान-प्रधान सर्पोंके नाम  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.57.4 
वासुके: कुलजातांस्तु प्राधान्येन निबोध मे।
नीलरक्तान् सितान् घोरान् महाकायान् विषोल्बणान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पहले वासुकि के कुल में उत्पन्न हुए मुख्य-मुख्य नागों के नाम सुनो - वे सब-के-सब नीले, लाल, श्वेत और भयानक थे। उनके शरीर विशाल थे और उनका विष अत्यंत भयंकर था ॥4॥
 
First listen to the names of the main snakes born in the clan of Vasuki - all of them were blue, red, white and terrifying. Their bodies were huge and their poison was extremely dangerous. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)