Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.57.23-24: उनकी लम्बाई-चौड़ाई एक-एक योजन से लेकर दो-दो योजन तक थी। वे इच्छानुसार रूप धारण कर सकते थे और इच्छानुसार बल और पराक्रम से संपन्न थे। वे सभी प्रज्वलित अग्नि के समान घातक विष से युक्त थे। अपनी माता के ब्रह्मदण्डरूपी शाप से पीड़ित होकर वे उस महाअग्नि में भस्म हो गए॥23-24॥ | mahabharat अध्याय 1.57: सर्पयज्ञमें दग्ध हुए प्रधान-प्रधान सर्पोंके नाम । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनकी लम्बाई-चौड़ाई एक-एक योजन से लेकर दो-दो योजन तक थी। वे इच्छानुसार रूप धारण कर सकते थे और इच्छानुसार बल और पराक्रम से संपन्न थे। वे सभी प्रज्वलित अग्नि के समान घातक विष से युक्त थे। अपनी माता के ब्रह्मदण्डरूपी शाप से पीड़ित होकर वे उस महाअग्नि में भस्म हो गए॥23-24॥
Their length and breadth were one to two yojanas each. They could assume any form as per their wish and were endowed with strength and valour as per their desire. All of them were filled with a deadly poison like a blazing fire. Being afflicted by the curse of their mother in the form of Brahmadanda, they were burnt to ashes in that great fire.॥23-24॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सर्पनामकथने सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें सर्पनामकथनविषयक सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥