| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 57: सर्पयज्ञमें दग्ध हुए प्रधान-प्रधान सर्पोंके नाम » श्लोक 11-12h |
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| | | | श्लोक 1.57.11-12h  | पारावत: पारिजात: पाण्डरो हरिण: कृश:।
विहङ्ग: शरभो मेद: प्रमोद: संहतापन:॥ ११॥
ऐरावतकुलादेते प्रविष्टा हव्यवाहनम्। | | | | | | अनुवाद | | पर्वत, पारिजात, पांडार, मृग, कृष, विहंग, शरभ, मेद, प्रमोद और संहत्पन - ये ऐरावत के कुल से आये और अग्नि में आहूत हो गये। | | | | Paravat, Paarijaat, Pandara, Deer, Krish, Vihang, Sharabha, Med, Pramod and Samhatapana - these came from the clan of Airavata and became sacrifices in the fire. | | ✨ ai-generated | | |
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