Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.56.7: 'राजन्! मैं यह पुराणों में यह जानकर कह रहा हूँ कि इन्द्र ने तक्षक को वरदान दिया है - 'सर्पराज! तुम मेरे पास सुरक्षित रहो। सर्प के विष की अग्नि तुम्हें नहीं जला सकेगी।' | mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'राजन्! मैं यह पुराणों में यह जानकर कह रहा हूँ कि इन्द्र ने तक्षक को वरदान दिया है - 'सर्पराज! तुम मेरे पास सुरक्षित रहो। सर्प के विष की अग्नि तुम्हें नहीं जला सकेगी।'
‘King! I am saying this after knowing the Puranas that Indra has given a boon to Takshak - 'King of snakes! You stay here safely near me. The fire of the snake's poison will not burn you.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥