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mahabharat 1.56.6: लाल नेत्रों वाले पुराणों के विद्वान महात्मा सूतजी ने पहले ही इसकी सूचना दे दी थी। तब राजा ने सूतजी से इस विषय में पूछा। पूछने पर उन्होंने राजा से कहा - 'नरदेव! ब्राह्मण जो कुछ कह रहे हैं, वह ठीक वैसा ही है।'   |   mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.56.6 
यथा सूतो लोहिताक्षो महात्मा
पौराणिको वेदितवान् पुरस्तात् ।
स राजानं प्राह पृष्टस्तदानीं
यथाहुर्विप्रास्तद्वदेतन्नृदेव॥ ६॥
 
 
अनुवाद
लाल नेत्रों वाले पुराणों के विद्वान महात्मा सूतजी ने पहले ही इसकी सूचना दे दी थी। तब राजा ने सूतजी से इस विषय में पूछा। पूछने पर उन्होंने राजा से कहा - 'नरदेव! ब्राह्मण जो कुछ कह रहे हैं, वह ठीक वैसा ही है।'
 
The red-eyed Puranas scholar Mahatma Sutji had already informed about this. Then the king asked Sutji about this. On being asked, he told the king - 'Nardev! Whatever the Brahmins are saying, it is exactly like that. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)