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mahabharat 1.56.27: तब सभा के सभी वेद-ज्ञानी सदस्य एकत्रित हुए और राजा से बोले, 'ब्राह्मण को अवश्य ही वरदान मिलना चाहिए।'   |   mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.56.27 
ततो वेदविदस्तात सदस्या: सर्व एव तम्।
राजानमूचु: सहिता लभतां ब्राह्मणो वरम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तब सभा के सभी वेद-ज्ञानी सदस्य एकत्रित हुए और राजा से बोले, 'ब्राह्मण को अवश्य ही वरदान मिलना चाहिए।'
 
Then all the Veda-knowing members of the assembly gathered together and said to the king, 'The Brahmin must get the boon.'
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि आस्तीकवरप्रदानं नाम षट्पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें आस्तीकको वरप्रदान नामक छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)