Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.56.24: आस्तिक बोला - हे राजन, मैं आपसे सोना, चाँदी और गायें नहीं माँगूँगा। मैं तो केवल इतना चाहता हूँ कि आपका यज्ञ बंद हो जाए ताकि मेरी माँ का कुल समृद्ध हो सके। | mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आस्तीक उवाच
सुवर्णं रजतं गाश्च न त्वां राजन् वृणोम्यहम्।
सत्रं ते विरमत्वेतत् स्वस्ति मातृकुलस्य न:॥ २४॥
अनुवाद
आस्तिक बोला - हे राजन, मैं आपसे सोना, चाँदी और गायें नहीं माँगूँगा। मैं तो केवल इतना चाहता हूँ कि आपका यज्ञ बंद हो जाए ताकि मेरी माँ का कुल समृद्ध हो सके।
Aastik said - O King, I will not ask for gold, silver and cows from you. I only wish that your sacrifice should be stopped so that my mother's family may prosper.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥