Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.56.23: हे ब्राह्मण! तुम सोना, चाँदी, गौ आदि अपनी इच्छानुसार जो भी वस्तुएँ माँग लो। हे प्रभु! तुम जो भी वर माँगोगे, मैं तुम्हें दे सकता हूँ, परन्तु मेरा यह यज्ञ रुकना नहीं चाहिए।॥23॥ | mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुवर्णं रजतं गाश्च यच्चान्यन्मन्यसे विभो।
तत् ते दद्यां वरं विप्र न निवर्तेत् क्रतुर्मम॥ २३॥
अनुवाद
हे ब्राह्मण! तुम सोना, चाँदी, गौ आदि अपनी इच्छानुसार जो भी वस्तुएँ माँग लो। हे प्रभु! तुम जो भी वर माँगोगे, मैं तुम्हें दे सकता हूँ, परन्तु मेरा यह यज्ञ रुकना नहीं चाहिए।॥23॥
'O Brahmin! You may ask for gold, silver, cow and other things of your choice, which you deem fit. O Lord! I can give you whatever boon you ask for, but this sacrifice of mine should not be stopped.'॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥