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mahabharat 1.56.22: ब्राह्मण! आस्तिक के ऐसा कहने पर परीक्षितकुमार जन्मेजय खिन्न हो गये और बोले - 22॥   |   mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.56.22 
एवमुक्तस्तदा तेन ब्रह्मन् पारिक्षितस्तु स:।
नातिहृष्टमनाश्चेदमास्तीकं वाक्यमब्रवीत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण! आस्तिक के ऐसा कहने पर परीक्षितकुमार जन्मेजय खिन्न हो गये और बोले - 22॥
 
Brahman! When Aastika said this, Parikshitkumar Janmejaya became upset and said - 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)