Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.56.2: सभासदों ने कहा - ब्राह्मण यदि बालक भी है, तो भी यहाँ के राजाओं के लिए आदरणीय है। यदि वह विद्वान है, तो फिर और क्या कहा जाए? अतः यह ब्राह्मण बालक आज ही आपके द्वारा विधिपूर्वक अपनी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करवाने योग्य है, किन्तु वरदान देने से पूर्व हमें ऐसा उपाय करना चाहिए कि तक्षक नाग शीघ्रातिशीघ्र हमारे पास पहुँच जाए॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सदस्या ऊचु:
बालोऽपि विप्रो मान्य एवेह राज्ञां
विद्वान् यो वै स पुनर्वै यथावत्।
सर्वान् कामांस्त्वत्त एवार्हतेऽद्य
यथा च नस्तक्षक एति शीघ्रम्॥ २॥
अनुवाद
सभासदों ने कहा - ब्राह्मण यदि बालक भी है, तो भी यहाँ के राजाओं के लिए आदरणीय है। यदि वह विद्वान है, तो फिर और क्या कहा जाए? अतः यह ब्राह्मण बालक आज ही आपके द्वारा विधिपूर्वक अपनी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करवाने योग्य है, किन्तु वरदान देने से पूर्व हमें ऐसा उपाय करना चाहिए कि तक्षक नाग शीघ्रातिशीघ्र हमारे पास पहुँच जाए॥ 2॥
The members said - Even if the Brahmin is a child, he is still respectable for the kings here. If he is a scholar, then what more can be said? Therefore, this Brahmin boy is worthy of getting all his desires fulfilled by you in a proper manner today, but before granting the boon, we should take measures so that Takshak Naag reaches us as quickly as possible.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥