Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.56.19: इन्द्र ने अवश्य ही सर्पराज तक्षक को त्याग दिया है। उसका विशाल शरीर मन्त्र से मोहित होकर स्वर्ग से नीचे गिर पड़ा है। वह आकाश में चक्कर लगाता हुआ अपनी सुध-बुध खो बैठा है और बड़े वेग से दीर्घ श्वास छोड़ते हुए अग्निकुण्ड के पास आ रहा है॥19॥ | mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्र ने अवश्य ही सर्पराज तक्षक को त्याग दिया है। उसका विशाल शरीर मन्त्र से मोहित होकर स्वर्ग से नीचे गिर पड़ा है। वह आकाश में चक्कर लगाता हुआ अपनी सुध-बुध खो बैठा है और बड़े वेग से दीर्घ श्वास छोड़ते हुए अग्निकुण्ड के पास आ रहा है॥19॥
Indra has certainly abandoned the King of Snakes, Takshak. His huge body has fallen down from heaven, attracted by the mantra. He has lost his senses while circling in the sky and is coming near the fire pit, breathing out long breaths with great speed.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥