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mahabharat 1.56.18: ऋत्विज बोले - हे राजन! यह तक्षक नाग शीघ्र ही आपके वश में आने वाला है। यह अत्यन्त भयानक स्वर में चिल्ला रहा है। इसकी तीव्र चीखें अब सुनाई दे रही हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.56.18 
ऋत्विज ऊचु:
अयमायाति तूर्णं स तक्षकस्ते वशं नृप।
श्रूयतेऽस्य महान् नादो नदतो भैरवं रवम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ऋत्विज बोले - हे राजन! यह तक्षक नाग शीघ्र ही आपके वश में आने वाला है। यह अत्यन्त भयानक स्वर में चिल्ला रहा है। इसकी तीव्र चीखें अब सुनाई दे रही हैं।
 
The Ritwij said - O King! This Takshak snake is soon coming under your control. He is screaming in a very terrifying voice. His loud screams can now be heard. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)