Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.56.17: जनमेजय बोले, "ब्राह्मण बालक! तुम अतुलनीय हो। तुम्हारी प्रतिभा की कोई सीमा नहीं है। मैं तुम जैसे विद्वान को वरदान देना चाहता हूँ। तुम जो भी इच्छा करो, मुझे बताओ। यदि वह पूरी करने योग्य न भी हो, तो भी मैं तुम्हें अवश्य प्रदान करूँगा।" | mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनमेजय बोले, "ब्राह्मण बालक! तुम अतुलनीय हो। तुम्हारी प्रतिभा की कोई सीमा नहीं है। मैं तुम जैसे विद्वान को वरदान देना चाहता हूँ। तुम जो भी इच्छा करो, मुझे बताओ। यदि वह पूरी करने योग्य न भी हो, तो भी मैं तुम्हें अवश्य प्रदान करूँगा।"
Janamejaya said, "Brahmin boy! You are incomparable. Your talent has no limits. I want to grant a boon to a learned person like you. Tell me whatever you desire. Even if it is not worth fulfilling, I will definitely grant it to you." 17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥