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mahabharat 1.56.16: ऋत्विजों ने कहा- राजेन्द्र! तुम्हारा यह यज्ञ विधिपूर्वक सम्पन्न हो रहा है। अब तुम इस वीर आस्तिक को इच्छित वर प्रदान करो। 16॥   |   mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.56.16 
ऋत्विज ऊचु:
वर्तते तव राजेन्द्र कर्मैतद् विधिवत् प्रभो।
अस्मै तु द्विजमुख्याय वरं त्वं दातुमर्हसि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ऋत्विजों ने कहा- राजेन्द्र! तुम्हारा यह यज्ञ विधिपूर्वक सम्पन्न हो रहा है। अब तुम इस वीर आस्तिक को इच्छित वर प्रदान करो। 16॥
 
Ritvijo said- Rajendra! This yagya of yours is being completed in a proper manner. Now you can give the desired boon to this brave believer. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)