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mahabharat 1.56.14: यज्ञ को देखकर इन्द्र अत्यन्त भयभीत हो गये और तक्षक नाग को वहीं छोड़कर अत्यन्त घबराकर अपने महल की ओर चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.56.14 
पुरन्दरस्तु तं यज्ञं दृष्ट्वोरुभयमाविशत्।
हित्वा तु तक्षकं त्रस्त: स्वमेव भवनं ययौ॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ को देखकर इन्द्र अत्यन्त भयभीत हो गये और तक्षक नाग को वहीं छोड़कर अत्यन्त घबराकर अपने महल की ओर चल पड़े।
 
On seeing the sacrifice, Indra became very frightened and leaving Takshak snake there, he started walking towards his palace in great nervousness. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)