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mahabharat 1.56.13: इस यज्ञ के पश्चात् क्षण भर में ही इंद्र के साथ तक्षक नाग आकाश में प्रकट हुआ। उस समय वह अत्यन्त पीड़ा में था।   |   mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.56.13 
हूयमाने तथा चैव तक्षक: सपुरन्दर:।
आकाशे ददृशे चैव क्षणेन व्यथितस्तदा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस यज्ञ के पश्चात् क्षण भर में ही इंद्र के साथ तक्षक नाग आकाश में प्रकट हुआ। उस समय वह अत्यन्त पीड़ा में था।
 
After this sacrifice was made, within a moment Takshak Naag (snake) along with Indra appeared in the sky. He was in great pain at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)