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mahabharat 1.56.11: जनमेजय ने कहा- विप्रगण! यदि इन्द्र के विमान में तक्षक सर्प छिपा हो तो उसे इन्द्र सहित अग्नि में डाल दो॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 56: राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.56.11 
जनमेजय उवाच
इन्द्र्रस्य भवने विप्रा यदि नाग: स तक्षक:।
तमिन्द्रेणैव सहितं पातयध्वं विभावसौ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने कहा- विप्रगण! यदि इन्द्र के विमान में तक्षक सर्प छिपा हो तो उसे इन्द्र सहित अग्नि में डाल दो॥11॥
 
Janamejaya said – Vipragan! If the snake Takshak is hidden in Indra's plane, then throw him into the fire along with Indra. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)