Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.55.8: ये आपके पुरोहित सूर्य के समान तेजस्वी हैं और इन्द्र के यज्ञ के समान आपके यज्ञ को सम्पन्न करते हैं। ऐसी कोई जानने योग्य वस्तु नहीं है जिसका ज्ञान इन्हें न हो। इन्हें दिया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता ॥8॥ | mahabharat अध्याय 1.55: आस्तीकके द्वारा यजमान, यज्ञ, ऋत्विज्, सदस्यगण और अग्निदेवकी स्तुति-प्रशंसा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इमे च ते सूर्यसमानवर्चस:
समासते वृत्रहण: क्रतुं यथा।
नैषां ज्ञातुं विद्यते ज्ञानमद्य
दत्तं येभ्यो न प्रणश्येत् कदाचित्॥ ८॥
अनुवाद
ये आपके पुरोहित सूर्य के समान तेजस्वी हैं और इन्द्र के यज्ञ के समान आपके यज्ञ को सम्पन्न करते हैं। ऐसी कोई जानने योग्य वस्तु नहीं है जिसका ज्ञान इन्हें न हो। इन्हें दिया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता ॥8॥
These priests of yours are as radiant as the Sun and perform your Yagya just like the Yagya of Indra. There is nothing worth knowing that they do not have the knowledge of. The donations given to them can never go waste. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥