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mahabharat 1.54.5: जरत्कारु बोले - बेटा! सभी सर्पों की माता कद्रू नाम से प्रसिद्ध हैं। एक बार उन्होंने क्रोधित होकर अपने पुत्रों को श्राप दे दिया था। मैं तुम्हें वह कारण बताता हूँ जिसके लिए उन्होंने उन्हें श्राप दिया था। सुनो।   |   mahabharat अध्याय 1.54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.54.5 
जरत्कारुरुवाच
पन्नगानामशेषाणां माता कद्रूरिति श्रुता।
तया शप्ता रुषितया सुता यस्मान्निबोध तत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जरत्कारु बोले - बेटा! सभी सर्पों की माता कद्रू नाम से प्रसिद्ध हैं। एक बार उन्होंने क्रोधित होकर अपने पुत्रों को श्राप दे दिया था। मैं तुम्हें वह कारण बताता हूँ जिसके लिए उन्होंने उन्हें श्राप दिया था। सुनो।
 
Jaratkaru said - Son! The mother of all the snakes is known by the name Kadru. Once she got angry and cursed her sons. I will tell you the reason for which she cursed them. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)