Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.54.25: मैं इस शाप को अवश्य ही नष्ट कर दूँगा, जो काली अग्नि के समान प्रज्वलित करने वाला और अत्यन्त भयंकर है। अतः तुम इससे किसी भी प्रकार मत डरो॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.54.25 
ब्रह्मदण्डं महाघोरं कालाग्निसमतेजसम्।
नाशयिष्यामि मात्र त्वं भयं कार्षी: कथंचन॥ २५॥
 
 
अनुवाद
मैं इस शाप को अवश्य ही नष्ट कर दूँगा, जो काली अग्नि के समान प्रज्वलित करने वाला और अत्यन्त भयंकर है। अतः तुम इससे किसी भी प्रकार मत डरो॥25॥
 
I shall certainly destroy this curse which is as burning as the black fire and is extremely dreadful. Therefore, do not be afraid of it in any way. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)