Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.54.24: अस्थिक ने कहा- हे श्रेष्ठ नागप्रवर! आपको किसी भी प्रकार का कष्ट न हो। मैं सर्पयज्ञ की प्रज्वलित अग्नि से आपके भय को नष्ट कर दूँगा॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 1.54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आस्तीक उवाच
न संतापस्त्वया कार्य: कथंचित् पन्नगोत्तम।
प्रदीप्ताग्ने: समुत्पन्नं नाशयिष्यामि ते भयम्॥ २४॥
अनुवाद
अस्थिक ने कहा- हे श्रेष्ठ नागप्रवर! आपको किसी भी प्रकार का कष्ट न हो। मैं सर्पयज्ञ की प्रज्वलित अग्नि से आपके भय को नष्ट कर दूँगा॥ 24॥
Asthik said- O great Naga Pravara! You should not be distressed in any way. I will destroy the fear that you have got from the blazing fire of the snake sacrifice.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥