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mahabharat 1.54.2: ‘बेटा! मेरे भाई ने एक उद्देश्य से मेरा विवाह तुम्हारे पिता से किया था। उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह उचित अवसर है। अतः तुम्हें उस उद्देश्य की पूर्ति उचित रीति से करनी चाहिए।’॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.54.2 
अहं तव पितु: पुत्र भ्रात्रा दत्ता निमित्तत:।
काल: स चायं सम्प्राप्तस्तत् कुरुष्व यथातथम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! मेरे भाई ने एक उद्देश्य से मेरा विवाह तुम्हारे पिता से किया था। उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह उचित अवसर है। अतः तुम्हें उस उद्देश्य की पूर्ति उचित रीति से करनी चाहिए।’॥2॥
 
‘Son! My brother had married me to your father for a purpose. This is the right opportunity to fulfill that purpose. So you should fulfill that purpose in the proper manner.'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)