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mahabharat 1.54.19: 'नागप्रवर! आप निश्चिन्त रहें। आपको कोई भय नहीं है। राजन! मैं आपके हित में जो भी करूँगी, वही करूँगी॥ 19॥   |   mahabharat अध्याय 1.54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.54.19 
भव स्वस्थमना नाग न हि ते विद्यते भयम्।
प्रयतिष्ये तथा राजन् यथा श्रेयो भविष्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'नागप्रवर! आप निश्चिन्त रहें। आपको कोई भय नहीं है। राजन! मैं आपके हित में जो भी करूँगी, वही करूँगी॥ 19॥
 
'Naagpravar! You should remain worry free. There is no fear for you. King! I will do whatever is good for you.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)