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mahabharat 1.54.18: हे महाबली सर्पराज वासुके! मैं तुम्हें तुम्हारी माता के उस शाप से मुक्त कर दूँगा। मैं तुमसे सत्य कहता हूँ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.54.18 
अहं त्वां मोक्षयिष्यामि वासुके पन्नगोत्तम।
तस्माच्छापान्महासत्त्व सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे महाबली सर्पराज वासुके! मैं तुम्हें तुम्हारी माता के उस शाप से मुक्त कर दूँगा। मैं तुमसे सत्य कहता हूँ॥18॥
 
'O mighty king of snakes Vasuke! I will free you from that curse of your mother. I am telling you the truth.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)