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श्लोक 1.54.18  |
अहं त्वां मोक्षयिष्यामि वासुके पन्नगोत्तम।
तस्माच्छापान्महासत्त्व सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| हे महाबली सर्पराज वासुके! मैं तुम्हें तुम्हारी माता के उस शाप से मुक्त कर दूँगा। मैं तुमसे सत्य कहता हूँ॥18॥ |
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| 'O mighty king of snakes Vasuke! I will free you from that curse of your mother. I am telling you the truth.॥ 18॥ |
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