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mahabharat 1.54.13: भगवान ब्रह्मा ने कहा: ऋषि जरत्कारु अपनी पत्नी जरत्कारु के गर्भ से उत्पन्न ब्राह्मण नागों को उनकी माता के शाप से मुक्त करेंगे।   |   mahabharat अध्याय 1.54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.54.13 
ब्रह्मोवाच
जरत्कारुर्जरत्कारुं यां भार्यां समवाप्स्यति।
तत्र जातो द्विज: शापान्मोक्षयिष्यति पन्नगान्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भगवान ब्रह्मा ने कहा: ऋषि जरत्कारु अपनी पत्नी जरत्कारु के गर्भ से उत्पन्न ब्राह्मण नागों को उनकी माता के शाप से मुक्त करेंगे।
 
Lord Brahma said: The sage Jaratkaru will free the Brahmin serpents born from the womb of the wife named Jaratkaru from the curse of their mother.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)