Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.54.12: देवताओं ने कहा - हे प्रभु! ये नागराज वासुकि अपने भाइयों के लिए अत्यन्त दुःखी हैं। माता का शाप इन लोगों पर न लगे, इसका क्या उपाय है?॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.54: माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवा ऊचु:
वासुकिर्नागराजोऽयं दु:खितो ज्ञातिकारणात्।
अभिशाप: स मातुस्तु भगवन् न भवेत् कथम्॥ १२॥
अनुवाद
देवताओं ने कहा - हे प्रभु! ये नागराज वासुकि अपने भाइयों के लिए अत्यन्त दुःखी हैं। माता का शाप इन लोगों पर न लगे, इसका क्या उपाय है?॥12॥
The gods said - O Lord! This King of Snakes Vasuki is very sad for his brothers. What is the solution so that the curse of the mother does not apply to these people?॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥